📉 AI का डर या मार्केट क्रैश? 90 मिनट में $3.6 ट्रिलियन डूबा, Nifty 559 पॉइंट्स टूटा – भारत पर कितना असर पड़ेगा
13 फरवरी 2026 को ग्लोबल शेयर बाजारों में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ 90 मिनट के भीतर दुनिया भर के मार्केट्स से करीब $3.6 ट्रिलियन की वैल्यू साफ हो गई, जो भारतीय रुपये में लगभग ₹3,26,16,000 करोड़ (326 लाख करोड़ रुपये) बैठती है। इतनी तेज गिरावट ने निवेशकों में घबराहट फैला दी है। इस बिकवाली की बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ता डर है, खासकर Anthropic कंपनी के नए AI टूल Claude Cowork के लॉन्च के बाद, जो कई ऑफिस और टेक्निकल काम बिना इंसानी मदद के कर सकता है।
ग्लोबल स्तर पर टेक सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। Nasdaq इंडेक्स करीब –1.6% गिरा, जिससे साफ है कि टेक कंपनियों में भारी सेलिंग हुई। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले बुलियन मार्केट में भी गिरावट देखने को मिली। गोल्ड की कीमत लगभग $4,900–$4,950 प्रति औंस तक फिसल गई, जो करीब –3.76% की गिरावट है, जबकि भारतीय रुपये में यह करीब ₹4.4 लाख प्रति औंस (31.1 ग्राम) बैठता है। वहीं सिल्वर $76 प्रति औंस पर आ गया और करीब –8.8% गिरा, जो रुपये में लगभग ₹6,800–₹7,000 प्रति औंस होता है। इसका मतलब है कि निवेशक हर जगह से पैसा निकालकर कैश में जा रहे हैं।
इस गिरावट का सीधा असर भारत पर भी दिख रहा है। Nifty पहले ही 559 पॉइंट्स टूट चुका है, और आज की ओपनिंग कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार 25,650 का लेवल पहला सपोर्ट है, जबकि इसके नीचे 25,200 तक गिरावट संभव है। अगर ये लेवल टूटे, तो बाजार में और तेज बिकवाली आ सकती है। खासकर IT सेक्टर पर दबाव ज्यादा है।
भारत की बड़ी IT कंपनियां जैसे TCS, Infosys और Wipro अपने कुल रेवेन्यू का लगभग 35–40% अमेरिका से कमाती हैं। अब Claude Cowork जैसे AI टूल्स कोडिंग, टेस्टिंग, डेटा एनालिसिस और रिपोर्टिंग जैसे काम ऑटोमेट कर रहे हैं। इससे कंपनियों को कम कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है, जिससे आउटसोर्सिंग बिजनेस मॉडल पर खतरा मंडरा रहा है। इसी वजह से इन कंपनियों के अमेरिकी ADR पहले ही गिर चुके हैं और घरेलू बाजार में भी कमजोरी बनी हुई है।
हालांकि, हर गिरावट सिर्फ खतरा नहीं बल्कि अवसर भी लेकर आती है। इतिहास बताता है कि 2008 की मंदी और 2020 के कोविड क्रैश के बाद बाजार ने मजबूत रिकवरी दी थी। संभव है कि मौजूदा AI पैनिक भी शॉर्ट टर्म रिएक्शन हो। लंबी अवधि में वही कंपनियां आगे बढ़ेंगी जो AI को अपनाकर अपने बिजनेस को मजबूत करेंगी।
कुल मिलाकर, फिलहाल बाजार में वोलैटिलिटी बहुत ज्यादा है। जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय समझदारी से निवेश करना जरूरी है। घबराहट में बेचने से नुकसान हो सकता है, जबकि मजबूत स्टॉक्स में गिरावट के दौरान धीरे-धीरे निवेश करना लंबी अवधि में फायदे का सौदा साबित हो सकता है। अब देखना होगा कि यह AI का असली खतरा है या निवेशकों का ओवररिएक्शन।
